हाँ मैं जानता हूँ उसे,
और इधर कुछ दिनों से खोज भी रहा हूँ.
पर वो मिल नहीं रहा,
जाने कहाँ खो गया है.
सोचता हूँ तो याद आता है,
अभी हाल में ही तो दिखा था,
वो फिर नज़र क्यों नहीं आता!
शायद मुझसे ही आँख मिचौली खेल रहा है,
सोचता होगा कि मुझे उलझा लेगा,
हरा देगा,
और हाँ, मैं उससे हारना भी चाहता हूँ,
देखना चाहता हूँ उसके चेहरे पर जीत कि चमक,
पर अभी मिल नहीं रहा,
यकीन है कि मिल ही जायेगा मुझको,
आज नहीं तो कल,
यहीं कहीं, आस पास.
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